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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Dec 2023

    फ़तवे जारी किया करो!

    सबको रुस्वा बारी बारी किया करो, हर मौसम में फ़तवे जारी किया करो|             राहत इंदौरी   

  • 29th Dec 2023

    नमकीन कहा है मैंने!

    ज़ाइक़े बारहा आँखों में मज़ा देते हैं, बाज़ चेहरों को भी नमकीन कहा है मैंने|             राहत इंदौरी   

  • 29th Dec 2023

    चील कव्वों को भी!

    मस्लहत कहिए उसे या कि सियासत कहिए, चील कव्वों को भी शाहीन कहा है मैंने|              राहत इंदौरी

  • 29th Dec 2023

    आमीन कहा है मैंने!

    काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने, तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने|           राहत इंदौरी

  • 29th Dec 2023

    फ़ैसले करने नहीं देते!

    हमीं उनसे उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं, हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते|                  वसीम बरेलवी 

  • 29th Dec 2023

    फिर से गूंज उठी रणभेरी!

    आज एक बार फिर मैं किसी जमाने में मंचों पर अपने गीतों से धूम मचाने वाले विख्यात कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –…

  • 28th Dec 2023

    मुख़्तसर करने नहीं!

    क़लम मैं तो उठा के जाने कब का रख चुका होता, मगर तुम हो के क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते|                वसीम बरेलवी

  • 28th Dec 2023

    यही क़तरे जो!

    यही क़तरे जो दम अपना दिखाने पर उतर आते, समुंदर ऐसी मन-मानी तुझे करने नहीं देते|               वसीम बरेलवी

  • 28th Dec 2023

    तो यूँ धरने नहीं देते!

    ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर, अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते|               वसीम बरेलवी

  • 28th Dec 2023

    दिल भरने नहीं देते!

    निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते, यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते|               वसीम बरेलवी

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