कहा हुआ न सुना हुआ

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ,

वो ग़ज़ल का लहजा नया नया न कहा हुआ न सुना हुआ|

                   बशीर बद्र

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