A sky full of cotton beads like clouds
सोज़ भर दो मिरे सपने में ग़म-ए-उल्फ़त का,
मैं कोई मोम नहीं हूँ जो पिघल जाऊँगा|
साहिर लुधियानवी
बहुत सुंदर ।
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हार्दिक धन्यवाद जी
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