Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 24th Apr 2024

    मेरी ज़बाँ से सुनिए!

    चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए, हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली

  • 24th Apr 2024

    रात-रात भर जब आशा!

    आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत…

  • 23rd Apr 2024

    उसी बेवफ़ा की बात करें!

    वफ़ा-शिआर कई हैं कोई हसीं भी तो हो, चलो फिर आज उसी बेवफ़ा की बात करें|    साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    किस ख़ुदा की बात करें!

    हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया, करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    तहज़ीब में क़बा ही नहीं!

    हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं, अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें| *गाउन जैसा ढीला वस्त्र साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    मुद्दआ की बात करें!

    उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न हों, इस एहतियात से क्या मुद्दआ की बात करें| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    वो ख़ुदा की बात करें!

    सज़ा का हाल सुनाएँ जज़ा* की बात करें, ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें| *कर्मफल साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    पास आओ तो कोई बात बने!

    नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    जो भी है आदमी से कमतर है!

    रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है, इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी

  • 23rd Apr 2024

    हमको यूं ही प्यासा छोड़!

    आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि/शायर रहे स्वर्गीय से बेकल उत्साही जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बेकल जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की यह ग़ज़ल – हम को यूँ ही…

←Previous Page
1 … 714 715 716 717 718 … 1,532
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,133 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar