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मेरी ज़बाँ से सुनिए!
चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए, हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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रात-रात भर जब आशा!
आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत…
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उसी बेवफ़ा की बात करें!
वफ़ा-शिआर कई हैं कोई हसीं भी तो हो, चलो फिर आज उसी बेवफ़ा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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किस ख़ुदा की बात करें!
हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया, करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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तहज़ीब में क़बा ही नहीं!
हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं, अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें| *गाउन जैसा ढीला वस्त्र साहिर लुधियानवी
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मुद्दआ की बात करें!
उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न हों, इस एहतियात से क्या मुद्दआ की बात करें| साहिर लुधियानवी
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वो ख़ुदा की बात करें!
सज़ा का हाल सुनाएँ जज़ा* की बात करें, ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें| *कर्मफल साहिर लुधियानवी
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पास आओ तो कोई बात बने!
नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
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जो भी है आदमी से कमतर है!
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है, इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
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हमको यूं ही प्यासा छोड़!
आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि/शायर रहे स्वर्गीय से बेकल उत्साही जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बेकल जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की यह ग़ज़ल – हम को यूँ ही…