कब ये मजाल है!

मिरी हर ख़ुशी तिरे दम से है मिरी ज़िंदगी तिरे ग़म से है,

तिरे दर्द से रहे बे-ख़बर मिरे दिल की कब ये मजाल है|

मजरूह सुल्तानपुरी

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