याचना!

आज फिर से मैं छायावाद युग से प्रारंभ कर रहा हूँ और छायावाद के एक प्रमुख स्तंभ, प्रकृति के सुकोमल कवि कहलाने वाले हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

विमल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता –

बना मधुर मेरा जीवन!
नव नव सुमनों से चुन चुन कर
धूलि, सुरभि, मधुरस, हिम-कण,
मेरे उर की मृदु-कलिका में
भरदे, करदे विकसित मन।

बना मधुर मेरा भाषण!
बंशी-से ही कर दे मेरे
सरल प्राण औ’ सरस वचन,
जैसा जैसा मुझको छेड़ें
बोलूँ अधिक मधुर, मोहन;
जो अकर्ण-अहि को भी सहसा
करदे मन्त्र-मुग्ध, नत-फन,
रोम रोम के छिद्रों से मा!
फूटे तेरा राग गहन,
बना मधुर मेरा तन, मन!

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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One response to “याचना!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💖

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