-
प्रलाप!
आज फिर से मैं छायावाद युग में ही रहते हुए, स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| निराला जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह कविता- वीणानिन्दित वाणी बोल!संशय-अन्धकामय पथ पर भूला प्रियतम तेरा–सुधाकर-विमल धवल मुख…
-
और मैं मिलूँ नहीं!
ऐ मौत कम ही रहता हूँ मैं अपने आप में, ऐसा न हो न कि आए तू और मैं मिलूँ नहीं| राजेश रेड्डी