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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Oct 2023

    शर्मसार कर लिया जाए

    सोच कर इस जहाँ के बारे में, ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    शुमार कर लिया जाए!

    एक ही शख़्स तो जहान में है, ख़ुद को भी गर शुमार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    तुझ पे फिर ए’तिबार!

    तजरबों को भुला के चाहते हैं, तुझ पे फिर ए’तिबार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    प्रलाप!

    आज फिर से मैं छायावाद युग में ही रहते हुए, स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  निराला जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह कविता- वीणानिन्दित वाणी बोल!संशय-अन्धकामय पथ पर भूला प्रियतम तेरा–सुधाकर-विमल धवल मुख…

  • 4th Oct 2023

    इंतिज़ार कर लिया जाए

    ख़ुद-कुशी को उधार रखते हुए, मौत का इंतिज़ार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 4th Oct 2023

    कमान से निकले!

    ज़िंदगी की कमान से निकले, तीर को आर-पार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 4th Oct 2023

    ख़ुद को फिर तार तार!

    फिर जुनूँ को सवार कर लिया जाए, ख़ुद को फिर तार तार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 4th Oct 2023

    बहार कर लिया जाए!

    ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए, इस ख़िज़ाँ को बहार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 4th Oct 2023

    और मैं मिलूँ नहीं!

    ऐ मौत कम ही रहता हूँ मैं अपने आप में, ऐसा न हो न कि आए तू और मैं मिलूँ नहीं| राजेश रेड्डी

  • 4th Oct 2023

    वो हो के रह गया हूँ!

    क़ीमत चुका रहा हूँ मैं शोहरत की इस तरह, वो हो के रह गया हूँ जो दर-अस्ल हूँ नहीं| राजेश रेड्डी

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