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उत्खनन!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के पुरोधा स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – उत्खनन किया है मैंने गहराई तक अतीत का । सिन्धु-सभ्यता से अब तकमुझको एक…
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किसी का जिगर नहीं!
रखते क़दम जो वादी-ए-उल्फ़त में बे-धड़क, ‘हैरत’ सिवा तुम्हारे किसी का जिगर नहीं| हैरत इलाहाबादी