ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते,
बिस्मिल* हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते|
*ज़ख्मी
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds
ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते,
बिस्मिल* हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते|
*ज़ख्मी
अहमद फ़राज़
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