दुआ क्यूँ नहीं देते!

ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते,

बिस्मिल* हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते|

*ज़ख्मी

अहमद फ़राज़

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