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नींद भी मेरे नयन की!
आज एक बार फिर से मैं देश में फिल्मों और काव्य मंचों पर अपने अमर गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले गीतों के राजकुंवर स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास नीरज…
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राहत भी बड़ी हो जैसे!
आज दिल खोल के रोए हैं तो यूँ ख़ुश हैं ‘फ़राज़’, चंद लम्हों की ये राहत भी बड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़
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ज़ंजीर पड़ी हो जैसे!
मंज़िलें दूर भी हैं मंज़िलें नज़दीक भी हैं, अपने ही पाँव में ज़ंजीर पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़
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दिल में पड़ी हो जैसे!
तेरे माथे की शिकन पहले भी देखी थी मगर, ये गिरह अब के मिरे दिल में पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़
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उम्र पड़ी हो जैसे!
कितने नादाँ हैं तिरे भूलने वाले कि तुझे, याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़