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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Oct 2023

    कौन आकर हमें!

    तू न होगी तो फिर ऐ शाम-ए-फ़िराक़*, कौन आकर हमें बहलाएगा| *Departing क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    झूटी भी क़सम खाएगा!

    ए‘तिबार उसका हमेशा करना, वो तो झूटी भी क़सम खाएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    सच से कतराए अगर!

    सच से कतराए अगर लोग यहाँ, लफ़्ज़ मफ़्हूम* से कतराएगा| *Meaning क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    बात क्या फिर कोई!

    चल पड़ी रस्म जो कज-फ़हमी* की, बात क्या फिर कोई कर पाएगा| *ग़लतफ़हमी क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    साए को तरस जाएगा!

    मरहला रात का जब आएगा, जिस्म साए को तरस जाएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    नींद भी मेरे नयन की!

    आज एक बार फिर से मैं देश में फिल्मों और काव्य मंचों पर अपने अमर गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले गीतों के राजकुंवर स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास नीरज…

  • 8th Oct 2023

    राहत भी बड़ी हो जैसे!

    आज दिल खोल के रोए हैं तो यूँ ख़ुश हैं ‘फ़राज़’, चंद लम्हों की ये राहत भी बड़ी हो जैसे|    अहमद फ़राज़

  • 8th Oct 2023

    ज़ंजीर पड़ी हो जैसे!

    मंज़िलें दूर भी हैं मंज़िलें नज़दीक भी हैं, अपने ही पाँव में ज़ंजीर पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़

  • 8th Oct 2023

    दिल में पड़ी हो जैसे!

    तेरे माथे की शिकन पहले भी देखी थी मगर, ये गिरह अब के मिरे दिल में पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़

  • 8th Oct 2023

    उम्र पड़ी हो जैसे!

    कितने नादाँ हैं तिरे भूलने वाले कि तुझे, याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे| अहमद फ़राज़

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