क्या बीत गई अब के ‘फ़राज़’ अहल-ए-चमन* पर,
यारान-ए-क़फ़स** मुझको सदा क्यूँ नहीं देते|
*उद्यान के निवासी, **पिंजरे के साथी
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds
क्या बीत गई अब के ‘फ़राज़’ अहल-ए-चमन* पर,
यारान-ए-क़फ़स** मुझको सदा क्यूँ नहीं देते|
*उद्यान के निवासी, **पिंजरे के साथी
अहमद फ़राज़
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