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कभी यक़ीं की तरह!
फ़ज़ा में घुल से गए हैं उफ़ुक़ के नर्म ख़ुतूत, ज़मीं हसीन है ख़्वाबों की सरज़मीं की तरह| तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं, कभी गुमान की सूरत कभी यक़ीं की तरह| साहिर लुधियानवी
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हसीन फूल हसीं पतियाँ
जवान रात के सीने पे दूधिया आँचल, मचल रहा है किसी ख़ाब-ए-मर्मरीं की तरह| हसीन फूल हसीं पतियाँ हसीं शाख़ें, लचक रही हैं किसी जिस्म-ए-नाज़नीं की तरह| साहिर लुधियानवी
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रंग है वो उसका है!
मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग है वो उसका है, मेरे एहसास में जो है वो फ़ज़ा उसकी है| जावेद अख़्तर
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कवि आज सुना वह गान रे!
आज एक बार फिर मैं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, विख्यात राजनेता और वक्ता तथा हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| वाजपेयी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की यह…
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और सज़ा उसकी है!
सारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है, बे-गुनाही है मिरी और सज़ा उसकी है| जावेद अख़्तर
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हम ठहरे बंजारे लोग!
इस नगरी में क्यूँ मिलती है रोटी सपनों के बदले, जिन की नगरी है वो जानें हम ठहरे बंजारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे प्यारे प्यारे लोग!
नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो, हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग| जावेद अख़्तर
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साँसों के इक्तारे लोग!
वक़्त सिंघासन पर बैठा है अपने राग सुनाता है, संगत देने को पाते हैं साँसों के इक्तारे लोग| जावेद अख़्तर
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धीरे धीरे हारे लोग!
जीवन जीवन हमने जग में खेल यही होते देखा, धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे हैं बेचारे लोग!
दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग| जावेद अख़्तर