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जग में रह जाएंगे, प्यारे तेरे बोल!!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, और इस गीत के माध्यम से ही मैं मुकेश जी, राज कपूर साहब और मजरूह सुल्तानपुरी साहब को भी याद कर…
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अपना गान!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के एक मजबूत स्तंभ और एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की यह कविता – इसी में ऊषा का…
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गई बात छेड़ देती है!
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को, मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है| गुलज़ार
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टाँके उधेड़ देती है!
हवा के सींग न पकड़ो खदेड़ देती है, ज़मीं से पेड़ों के टाँके उधेड़ देती है| गुलज़ार
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वनवास का क्षेत्र- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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मीठा तिरा अंदाज़ था!
मैंने अल्फ़ाज़ तो बीजों की तरह छाँट दिए, ऐसा मीठा तिरा अंदाज़ था फ़रमाने का| गुलज़ार
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बुलबुला फिर से चला!
बुलबुला फिर से चला पानी में ग़ोते खाने, न समझने का उसे वक़्त न समझाने का| गुलज़ार