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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Oct 2023

    कुछ तो बताओ यारो!

    तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो, मैं कोई ग़ैर नहीं हूँ कि छुपाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    प्रत्यावर्तन!

    आज एक बार फिर मैं देश के एक श्रेष्ठ कवि और वरिष्ठ नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| श्री मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – सिर्फ़ सोने से सजाई देह मैंने…

  • 15th Oct 2023

    मैं चंद ख़्वाब…

    पता नहीं कि मिरे बाद उन पे क्या गुज़री, मैं चंद ख़्वाब ज़माने में छोड़ आया था| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    तूने बदन चुराया था!

    शगुफ़्ता फूल सिमटकर कली बने जैसे, कुछ इस कमाल से तूने बदन चुराया था| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    वो एक लम्हा कि मैं!

    मुआफ़ कर न सकी मेरी ज़िंदगी मुझको, वो एक लम्हा कि मैं तुझ से तंग आया था| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    पहचान भी न पाया था!

    गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर* की तरह, अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था| *चिंगारी चमकने का क्षण जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    क्या मिज़ाज पाया था!

    ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था, दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    इक़बाल हो सिवा तेरा!

    जो चाहता है कि इक़बाल हो सिवा तेरा, तो सब में बाँट बराबर से शादमानी* को| *खुशी शहरयार

  • 15th Oct 2023

    ख़्वाबों की पासबानी!

    बजाए मेरे किसी और का तक़र्रुर* हो, क़ुबूल जो करे ख़्वाबों की पासबानी को| *तैनाती शहरयार

  • 15th Oct 2023

    सियाह रात ने..

    सियाह रात ने बेहाल कर दिया मुझको, कि तूल दे नहीं पाया किसी कहानी को| शहरयार

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