-
पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं!
बुला रहा है मिरा जामा-ज़ेब* मिलने को, तो आज पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं| * वह व्यक्ति जिसके शरीर पर कपड़े शोभा दें इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
कि ढल रहा हूँ मैं!
तुझी पे ख़त्म है जानाँ मिरे ज़वाल* की रात, तू अब तुलू** भी हो जा कि ढल रहा हूँ मैं| *अस्त होना, **उदित होना इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं!
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं, कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
नाम बताना भी नहीं चाहता है!
मेरे लफ़्ज़ों में भी छुपता नहीं पैकर उस का, दिल मगर नाम बताना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
जो तुमको हो पसंद!
आज एक बार फिर मैं एक फिल्मी गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ| ये गीत सफ़र फिल्म के लिए इंदीवर जी ने लिखा था, कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने इसका संगीत दिया था और मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने इसको अपने मधुर स्वर ढालकर अमर कर दिया था| लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस फिल्मी…
-
गँवाना भी नहीं चाहता है!
अपने किस काम में लाएगा बताता भी नहीं, हम को औरों पे गँवाना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
ख़्वाब दिखाना भी नहीं चाहता है!
कैसे उस शख़्स से ताबीर पे इसरार करें, जो हमें ख़्वाब दिखाना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
ख़ाक उड़ाना भी नहीं चाहता है!
सैर भी जिस्म के सहरा की ख़ुश आती है मगर, देर तक ख़ाक उड़ाना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
छोड़ के जाना भी नहीं चाहता है!
जब से जाना है कि मैं जान समझता हूँ उसे, वो हिरन छोड़ के जाना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
-
राह पे लाना भी नहीं चाहता है!
उस को मंज़ूर नहीं है मिरी गुमराही भी, और मुझे राह पे लाना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी