A sky full of cotton beads like clouds
दरवाज़े के पास आ आ कर वापस मुड़ती चाप,
कौन है इस सुनसान गली में पास बुला कर देख|
मुनीर नियाज़ी
किस किस को पास बुलाऊं में जिंदगी को बुलाता हूं तो साथ मौत भी पास आती है
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