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गर्मियां!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की यह कविता- गुमसुम से इस मौसम मेंजब नहीं आती हवाएँसूखे होंठों वाली पत्तियाँबार-बार चोंचें खोलती चिड़ियाएँहरियाली पर लगी फफूँद कोई भी नहीं आताखिड़कियों…
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जब भी इस शहर में !
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में नीरज जी की ग़ज़ल का पहला शेर – जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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जिस दिल में बसा था प्यार !
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- जिस दिल में बसा था प्यार तेरा उस दिल को कभी का तोड़ दियाफिल्म- सहेली मुख्य कलाकार- रहमान, कल्पना आदि गीतकार- इंदीवर संगीतकार- कल्याणजी आनंदजी गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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क्षण भर को क्यों प्यार किया था!
आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हरिवंश राय जी का यह गीत– क्षण भर को क्यों प्यार किया था? अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर,पलक संपुटों में मदिरा…
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आती रुत मुझे रोएगी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में नासिर काज़मी जी की ग़ज़ल का अंतिम शेर जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है- आती रुत मुझे रोएगी जाती रुत का झोंका हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******