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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Mar 2026

    वो दिल से कम ज़बाँ ही से!

    वो दिल से कम ज़बाँ ही से ज़ियादा बात करता था,जभी उस के यहाँ गहराई कम वुसअ’त ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 6th Mar 2026

    ज़मीं के हर खिलौने की!

    मयस्सर मुफ़्त में थे आसमाँ के चाँद तारे तक,ज़मीं के हर खिलौने की मगर क़ीमत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 6th Mar 2026

    दाता एक राम -2

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की इस हास्य कविता का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 6th Mar 2026

    मिरे इंकार में इक़रार!

    ज़माने से अलग रह कर भी मैं शामिल रहा इस में,मिरे इंकार में इक़रार की निय्यत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 6th Mar 2026

    अब के तज़्दीद ए वफ़ा !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में अहमद फराज़ जी की लिखी एक बहुत खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसको ग़ुलाम अली जी ने बहुत सुरीले तरीके से गाया है- अब के तज़्दीद ए वफ़ा का नहीं इमकां जानां! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *******

  • 6th Mar 2026

    जवाँ होने से पहले ही!

    जवाँ होने से पहले ही बुढ़ापा आ गया हम पर,हमारी मुफ़्लिसी पर उम्र की उजलत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 6th Mar 2026

    बोगनबेलिया!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नंदन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह गीत– ओ पियाआग लगाए बोगनबेलिया! पूनम के आसमान मेंबादल छाया,मन का जैसेसारा दर्द छितराया,सिहर-सिहर…

  • 5th Mar 2026

    कुछ ग़ैरत ज़ियादा थी!

    बुलंदी के लिए बस अपनी ही नज़रों से गिरना था,हमारी कम-नसीबी हम में कुछ ग़ैरत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 5th Mar 2026

    हैरत ज़ियादा थी!

    तअज्जुब में तो पड़ता ही रहा है आइना अक्सर,मगर इस बार उस की आँखों में हैरत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

  • 5th Mar 2026

    मगर मोहलत ज़ियादा थी!

    इजाज़त कम थी जीने की मगर मोहलत ज़ियादा थी,हमारे पास मरने के लिए फ़ुर्सत ज़ियादा थी| राजेश रेड्डी

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