जब भी इस शहर में !

मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में नीरज जी की ग़ज़ल का पहला शेर –

जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला

आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।

******

Leave a comment