गर्मियां!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की यह कविता-

गुमसुम से इस मौसम में
जब नहीं आती हवाएँ
सूखे होंठों वाली पत्तियाँ
बार-बार चोंचें खोलती चिड़ियाएँ
हरियाली पर लगी फफूँद

कोई भी नहीं आता
खिड़कियों के सामने
पंख फड़फड़ाता

उदास गुज़र जाती हैं
लड़कियाँ
और टहनियाँ
खींचती हैं साँसें

प्यास है चारों तरफ़
हाथ फैलाए

हो गया है
सोने का वक़्त

उड़ गई है नींद !

आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “गर्मियां!”

  1. Bahut hi sundar🙏🏻

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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