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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th May 2026

    मेरी रात कैसे चमक गई!

    कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई,मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    ख़त्म अपना सफ़र न हो!

    कभी दिन की धूप में झूम के कभी शब के फूल को चूम केयूँ ही साथ साथ चलें सदा कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    मेरे महबूब क़यामत होगी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मै आज किशोर कुमार जी का गाया ‘मिस्टर एक्स इन बॉम्बे’ फिल्म का गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और इसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोडी ने तैयार किया था- मेरे महबूब क़यामत होगी, आज रुसवा तेरी गलियों मे मोहब्बत…

  • 13th May 2026

    कुंज कुटीरे यमुना तीरे!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – पगली तेरा ठाट !किया है रतनाम्बर परिधानअपने काबू नहीं,और यह सत्याचरण विधान ! उन्मादक मीठे सपने ये,ये न…

  • 12th May 2026

    बे-चराग़ ये घर न हो!

    ये ग़ज़ल कि जैसे हिरन की आँख में पिछली रात की चाँदनी,न बुझे ख़राबे की रौशनी कभी बे-चराग़ ये घर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    न उठे सितारों की पालकी!

    मिरे बाज़ुओं में थकी थकी अभी महव-ए-ख़्वाब है चाँदनी न उठे सितारों की पालकी अभी आहटों का गुज़र न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    मिरी दुआ में असर न हो!

    वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे, तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मिरी दुआ में असर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    मुझे एक रात नवाज़ दे!

    कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो,मुझे एक रात नवाज़ दे मगर इस के बा’द सहर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    जान तुझ पर निसार करता हूँ!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत हैं, मेरे स्वर में मिर्ज़ा ग़ालिब जी की ग़ज़ल के कुछ और शेर- जान तुझ पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 12th May 2026

    कोई दुश्मन न कोई दोस्त!

    जंगल में दूर तक कोई दुश्मन न कोई दोस्त,मानूस हो चले हैं मगर बम्बई से हम| निदा फ़ाज़ली

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