Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 25th Sep 2026

    दुनिया के कारोबार से!

    पहले थे जो भी आज मगर कारोबार-ए-इश्क़,दुनिया के कारोबार से मिलता हुआ सा है। शहरयार

  • 25th Sep 2026

    ज़िन्दगी तेरी अता थी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर –ज़िन्दगी तेरी अता थी सो तेरे नाम की है!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 25th Sep 2026

    ज़िंदगी और बता….

    अपनी लाइव यूट्यूब प्रस्तुति में मैंने कुछ फिल्मी, गैर फिल्मी गीत, ग़ज़लें आदि प्रस्तुत की थीं जो आपके अवलोकन/श्रवण हेतु प्रस्तुत हैं- ज़िंदगी और बता – ज़िंदगी’ से जुडे कुछ फिल्मी, गैर फिल्मी गीत, ग़ज़लें आदि , संक्षिप्त झलक आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 25th Sep 2026

    ले दे के एक दिल है !

    नज़राना तेरे हुस्न को क्या दें कि अपने पास,ले दे के एक दिल है सो टूटा हुआ सा है। शहरयार

  • 25th Sep 2026

    दर्दे दिल दर्दे जिगर!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- दर्दे दिल दर्दे जिगर दिल में बसाया आपने! फिल्म- कर्ज़ मुख्य कलाकार- रिशी कपूर, टीना मुनीम गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- मोहम्मद रफ़ी प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 25th Sep 2026

    बादल भाई!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।यायावर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। उनके निधन से पहले काफी समय तक हम फेसबुक के माध्यम से आपस में चर्चा करते थे।आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत यायावर जी की यह कविता- बादल भाई!तुम…

  • 24th Sep 2026

    क्या हादिसा हुआ है!

    क्या हादिसा हुआ है जहाँ में कि आज फिर,चेहरा हर एक शख़्स का उतरा हुआ सा है। शहरयार

  • 24th Sep 2026

    क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे!

    चल चल के थक गया है कि मंज़िल नहीं कोई,क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे ठहरा हुआ सा है। शहरयार

  • 24th Sep 2026

    यूं ही मौसम की अदा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर – यूं ही मौसम की अदा देख के याद आया है!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 24th Sep 2026

    हर फूल अपनी शाख़ से!

    गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुलहर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है। शहरयार

←Previous Page
1 … 12 13 14 15 16 … 1,523
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar