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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th May 2026

    पल पल दिल के पास!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म-ब्लैकमेल के लिए किशोर कुमार जी का गाया यह गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे राजेंद्र कृष्ण जी ने लिखा था और कल्याणजी आनंदजी ने इसका संगीत तैयार किया था- पल पल दिल के पास तुम रहती हो! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 12th May 2026

    किसी दिन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मंगलेश डबराल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मंगलेष डबराल जी की यह कविता – किसी दिन हम दीवाल पर पीठ टिका देंगेहम जो बैठे हैंरोशनी में कविता बाँचते हुए किसी दिन हमारे…

  • 11th May 2026

    अच्छी भली थी दुनिया!

    अच्छी भली थी दुनिया गुज़ारे के वास्ते,उलझे हुए हैं अपनी ही ख़ुद-आगही से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    शाइस्ता महफ़िलों की !

    शाइस्ता महफ़िलों की फ़ज़ाओं में ज़हर था,ज़िंदा बचे हैं ज़ेहन की आवारगी से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    अच्छे बुरे के फ़र्क़ ने!

    अच्छे बुरे के फ़र्क़ ने बस्ती उजाड़ दी, मजबूर हो के मिलने लगे हर किसी से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    सब्ज़ा ओ गुल कहां से आए हैं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मिर्ज़ा ग़ालिब जी की ग़ज़ल के दो और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ – सब्ज़ा ओ गुल कहां से आए हैंअब्र क्या चीज़ है, हवा क्या है! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 11th May 2026

    मिलने गए किसी से !

    कुछ दूर चल के रास्ते सब एक से लगे,मिलने गए किसी से मिल आए किसी से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    लगे अजनबी से हम!

    जब से क़रीब हो के चले ज़िंदगी से हम,ख़ुद अपने आइने को लगे अजनबी से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    ओ मेरे दिल के चैन!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- ‘मेरे जीवन साथी’ के लिए किशोर कुमार जी का गाया गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और राहुल देव बर्मन जी ने इसका संगीत तैयार किया था- ओ मेरे दिल के चैन, चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिए! आशा…

  • 11th May 2026

    ओ मेरे विशेषण!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता  – हर विशेषण विशेष्य को कमज़ोर करता हैक्योंकि वह उसे अपना मुहताज बना लेता हैइसीलिए तो, मेरे…

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