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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th May 2026

    स्मृतियां!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि सुश्री ममता किरण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री ममता किरण जी की यह कविता – मेरी माँ की स्मृतियों में कैद हैआँगन और छत वाला घरआँगन में पली गायगाय का चारा सानी करती…

  • 15th May 2026

    भूल जाने की कोशिशें!

    तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं, तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई। बशीर बद्र

  • 15th May 2026

    वही इंतिज़ार की प्यास है!

    तिरे हाथ से मेरे होंट तक वही इंतिज़ार की प्यास है,मिरे नाम की जो शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई। बशीर बद्र

  • 15th May 2026

    मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- ‘अनजान राही’ के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे इंदीवर जी ने लिखा था और कल्याणजी आनंदजी ने इसका संगीत तैयार किया था- मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 15th May 2026

    नाविक – रवींद्र नाथ ठाकुर 

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 14th May 2026

    न कभी तुम्हारी झिजक गई!

    भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले,न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई। बशीर बद्र

  • 14th May 2026

    चांदी की दीवार न तोड़ी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में फिल्म-विश्वास के लिए मुकेश जी का गाया मधुर गीत जिसे गुलशन बावरा जी ने लिखा था और इसका संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था- चांदी की दीवार न तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******

  • 14th May 2026

    कालू नहीं रहा!

    देश वही है, काल वही है कालू नहीं रहामानवता का हाल वही है कालू नही रहा। जब तक था जीवन , घर भर में फिरता रहता था,दिखता कम था पर अनुभव से तिरता रहता था,थी पहचान उसे इस घर के कोने कोने कीभोजन स्थल की और खास कर निजी बिछौने की, किसी एक कोने में…

  • 13th May 2026

    मिरे साथ था तुझे जागना!

    मिरी दास्ताँ का उरूज था तिरी नर्म पलकों की छाँव में,मिरे साथ था तुझे जागना तिरी आँख कैसे झपक गई। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में क़तील शिफाई जी की ग़ज़ल के दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

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