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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Oct 2026

    जुबिली स्टार राजेंद्र कुमार जी की याद

    अपनी इस यूट्यूब लाइव प्रस्तुति में मैंने जुबिली स्टार कहे जाने वाले लोकप्रिय अभिनेता राजेंद्र कुमार जी को उनके द्वारा अभिनीत कुछ गीतों के माध्यम से याद किया। उनके कुछ गीतों के मुखडे और कुछ पूरे गीत भी मैंने अपने स्वर में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।…

  • 3rd Oct 2026

    एक परदेसी मेरा दिल ले गया!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- एक परदेसी मेरा दिल ले गया, जाते जाते मीठा मीठा ग़म दे गया !फिल्म- फागुन मुख्य कलाकार- भारत भूषण, मधुबालागीतकार- क़मर जलालाबादी संगीतकार- ओ . पी. नैयर गायक- मोहम्मद रफ़ी, आशा भोसले प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद…

  • 3rd Oct 2026

    कुछ दिन रहे छलावे में हम!

    प्रस्तुत है आज की यह रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कुछ दिन रहे छलावे में हमकुछ दिन रहे भुलावे में,कुछ तो सच है साथ चल रहेलोगों के इस दावे में। मंज़िल की लालसा हमेशाहम भी रखते रहे मगरभटके रहे अधिकतर हम बसमौसम के बहकावों में. सुनते हैं सबकी बातें हमपूरे ध्यान सहित लेकिनहमें खींच…

  • 2nd Oct 2026

    पंकज उधास जी की यादें!

    मैंने अपनी यूट्यूब लाइव प्रस्तुति में पंकज उधास जी का स्मरण उनकी गायी ग़ज़लों और गीतों के माध्यम से करने का प्रयास किया, इसकी प्रति आपके अवलोकन/श्रवण हेतु प्रस्तुत है- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *******

  • 2nd Oct 2026

    हम कि रूठी हुई रुत!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर- हम कि रूठी हुई रुत को भी मना लेते थे!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 2nd Oct 2026

    यही इंतिज़ार होता!

    ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 2nd Oct 2026

    कैफी आज़मी साहब की याद

    अपने इस लाइव स्ट्रीम में मैंने कैफी आज़मी साहब को उनके गीत-ग़ज़लों आदि के माध्यम से याद किया जिसके लिए मैंने उनकी कुछ रचनाओं के अंश और कुछ को पूरा अपने स्वर में प्रस्तुत किया है। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ****

  • 2nd Oct 2026

    है अपना दिल तो आवारा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- है अपना दिल तो आवारा न जाने किसपे आएगा !फिल्म- सोलहवां साल मुख्य कलाकार- देव आनंद, वहीदा रहमान गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीतकार- सचिन देव बर्मन गायक- हेमंत कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 1st Oct 2026

    भारी हैं सहर होते तक!

    ता-क़यामत शब-ए-फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र,सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होते तक| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 1st Oct 2026

    अब तेरा ज़िक्र भी शायद!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर- अब तेरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

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