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इश्क़ कुछ रोग नहीं था !
कितना मानूस सा हमदर्दों का ये दर्द रहा,इश्क़ कुछ रोग नहीं था जो दवाई लेते। राहत इंदौरी
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लोग क्यूँ आग हथेली पे!
आबले अपने ही अँगारों के ताज़ा हैं अभी,लोग क्यूँ आग हथेली पे पराई लेते। राहत इंदौरी
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किस किस से बुराई लेते!
बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते,एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते। राहत इंदौरी
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ख़ाली कई मकान पड़े!
किसी मकीन की आमद के इंतिज़ार में हैं,मिरे मोहल्ले में ख़ाली कई मकान पड़े| राहत इंदौरी
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ओ मेरी जोहरा ज़बीं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- वक़्त का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मन्ना डे जी ने गाया था और जिसे बलराज साहनी जी पर फिल्माया गया था, गीतकार थे साहिर लुधियानवी और संगीत रवि जी का था- आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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नर हो, न निराश करो मन को!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा जिन्हें राष्ट्रकवि भी कहा गया, ऐसे स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।गुप्त जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की यह प्रसिद्ध कविता- नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ…
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पाँव आसमान पड़े!
उठे हैं हाथ मिरे हुर्मत-ए-ज़मीं के लिए,मज़ा जब आए कि अब पाँव आसमान पड़े। राहत इंदौरी
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मंज़र लहू-लुहान पड़े!
हमारे शहर की बीनाइयों पे रोते हैंतमाम शहर के मंज़र लहू-लुहान पड़े। राहत इंदौरी
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ज़िंदगी में जान पड़े!
सुकूत-ए-ज़ीस्त को आमादा-ए-बग़ावत कर,लहू उछाल कि कुछ ज़िंदगी में जान पड़े। राहत इंदौरी