संगीत!

आज एक बार फिर मैं देश में अपनी तरह के अनूठे श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यह छोटी सी रचना इस बात का उदाहरण है कि भवानी दादा किस प्रकार सहज भाव से चमत्कार पैदा कर देते थे|

भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता –


अमरूद से
आम पर
जा रही है गिलहरी

आते-जाते
गा रही है गिलहरी

इस किचकिच को संगीत
हाँ कह सकते हैं

भाव है इसमें
भावना है भय है
चिंता है स्नेह है लय है !


 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                               ********

4 responses to “संगीत!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 2 people

    1. नमस्कार जी

      Like

  2. मैंने भवानी प्रसाद जी की बहुत सारी रचनाएँ पढ़ी है पर ये नहीं पढ़ा था। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका जो आपने इसे शेयर किया🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. हार्दिक आभार जी

      Liked by 1 person

Leave a comment