ओ मेरे विशेषण!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता  –

हर विशेषण विशेष्य को कमज़ोर करता है
क्योंकि वह उसे अपना मुहताज बना लेता है
इसीलिए तो, मेरे विशेषण !
तुम मुझसे जीत गए हो
इसीलिए तो तुम हर बार मुँह फ़ाड़ कर हँसते हो
जब मैं तुमसे अपना सिर टकराता हूँ ।
कितनी बड़ी मूर्खता थी यह सोचना कि तुम्हारे बिना मैं कुछ नहीं हूँ
जब कि मैं जो कुछ हूँ, हो सकता हूँ, या होऊँगा
वह उतना ही जितना तुम्हारे बिना हूँ ।
तुम मैं नहीं हो यह ठीक है
तो फिर तुम हो ही क्या
महज़ एक डर, एक संकोच, एक आदत
जिससे मैं चाहे छूट न भी पाऊँ
पर जो मैं नहीं हूँ ।

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                            ********  

2 responses to “ओ मेरे विशेषण!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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