न उठे सितारों की पालकी!

मिरे बाज़ुओं में थकी थकी अभी महव-ए-ख़्वाब है चाँदनी

न उठे सितारों की पालकी अभी आहटों का गुज़र न हो।

बशीर बद्र

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