Category: Uncategorized
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लोगों से सुनते हैं!
ज़ख़्म तो हम ने इन आँखों से देखे हैं, लोगों से सुनते हैं मरहम होता है| जावेद अख़्तर
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दुनिया में कम होता है!
सच ये है बे-कार हमें ग़म होता है, जो चाहा था दुनिया में कम होता है| जावेद अख़्तर
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तुमसे दूरी, ये मजबूरी!
तुम से दूरी, ये मजबूरी, ज़ख़्म-ए-कारी, बेदारी, तन्हा रातें, सपने क़ातें, ख़ुद से बातें, मेरी ख़ू| जावेद अख़्तर
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फूल बिछौना, वो पहलू!
रातें महकी, साँसें दहकी, नज़रें बहकी, रुत लहकी, सप्न सलोना, प्रेम खिलौना, फूल बिछौना, वो पहलू| जावेद अख़्तर
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इस अरण्य में पैदल!
आज एक बार फिर मैं विख्यात नवगीतकार श्री अनूप अशेष जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| अनूप जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी का यह नवगीत – झाड़ी पकती झरबेरीपत्थर फूटे झरने दिन आए है पैदल चलकर बीहड़ घाट उतरने । पके बाँस…
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वो ज़ुल्फ़ें और ये बाज़ू!
ब़ाँबी नागिन, छाया आँगन, घुंघरू छन-छन, आशा मन, आँखें काजल, पर्बत बादल, वो ज़ुल्फ़ें और ये बाज़ू| जावेद अख़्तर
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मस्ती दारू, मैं और तू!
भिक्षु-दानी, प्यासा पानी, दरिया सागर, जल गागर, गुलशन ख़ुशबू, कोयल कूकू, मस्ती दारू, मैं और तू| जावेद अख़्तर
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रंगीं लब, आँखें जादू!
जिस्म दमकता, ज़ुल्फ़ घनेरी, रंगीं लब, आँखें जादू, संग-ए-मरमर, ऊदा बादल, सुर्ख़ शफ़क़, हैराँ आहू| जावेद अख़्तर