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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jun 2026

    क़तरों को कुचलते देखा!

    सब्ज़ा-ओ-गुल पे हवा रखती है शबनम लेकिन, फिर हवा को उन ही क़तरों को कुचलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 15th Jun 2026

    बे-झिझक चल न सका!

    बे-झिझक चल न सका दश्त-ए-वफ़ा में अब तक,रुकते देखा कभी उस शोख़ को चलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 15th Jun 2026

    कोरा कागज़ था ये मन मेरा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- कोरा कागज़ था ये मन मेरा, लिख दिया नाम इसपे तेरा!फ़िल्म – आराधनागीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार- सचिन देव बर्मनगायक- किशोर कुमार, लता मंगेशकरप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 15th Jun 2026

    धूप में जलते देखा!

    जिन को पाला था बहारों ने जहाँ भर की, उन्हें,आज़माइश की कड़ी धूप में जलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 15th Jun 2026

    यार हमें मत बांटो ज्ञान!

    प्रस्तुत है मेरी आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- यार हमें मत बांटो ज्ञानतुम बेचो अपना सामान। नहीं चाहिए लफ्फाजीमेरा बल मेरा ईमान। नियम कायदे विनिमय केक्या जानेंगे हम नादान। आंसू एकत्रित करके बनता ग़ालिब का दीवान। संवेदन की दुनिया मेंबरछी, भाले और कृपाण! ढोल, नगाड़े सब बाहर मन की यह बस्ती सुनसान!…

  • 14th Jun 2026

    नफ़रतें मिल गईं!

    नफ़रतें मिल गईं मा’सूम दिलों में अक्सर,चाहतों को दिल-ए-सफ़्फ़ाक में पलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 14th Jun 2026

    हमजोली शाखों के हाथ पांव!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी के नवगीत का अगला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- हमजोली शाखों के हाथ पांव, पानी में तैर नहीं पाए! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 14th Jun 2026

    राह-ए-उल्फ़त पे मगर!

    डगमगाते कभी क़दमों को सँभलते देखा,राह-ए-उल्फ़त पे मगर लोगों को चलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 14th Jun 2026

    मेरे महबूब क़यामत होगी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मेरे महबूब क़यामत होगी, आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी!फ़िल्म- मिस्टर एक्स इन बॉम्बेगीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायक- किशोर कुमारप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 14th Jun 2026

    जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। शुक्ल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल जी की यह कविता – जो मेरे घर कभी नहीं आएँगेमैं उनसे मिलनेउनके पास चला जाऊँगा।एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी मेरे…

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