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पानी न दे सराब तो दे!
मैं तेरी तंग-निगाही की क्या करूँ तावील,सुलगती आँखों को पानी न दे सराब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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उनको ख़्वाब तो दे!
है इख़्तियार में जितना तिरे तू उतना तो कर,न मिल सके कोई ताबीर, उन को ख़्वाब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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जाने क्या हो गया सवेरों को!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी के नवगीत का अगला भाग, रंजक जी हिंदी के अत्यंत श्रेष्ठ कलाकार थे आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
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थोड़ा सही शबाब तो दे!
तपिश ने वक़्त की झुलसा के उन को रक्खा है,ख़िज़ाँ-नसीबों को थोड़ा सही शबाब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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दिल क्या करे जब किसी को!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- दिल क्या करे जब किसी को, किसी से प्यार हो जाए!फिल्म- जूलीगीतकार-आनंद बक्षीसंगीतकार- राजेश रोशनगायक- किशोर कुमारप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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रफ़्तार पर है वो नाज़ाँ!
ये क्या कि अपनी ही रफ़्तार पर है वो नाज़ाँ,किसी के रेंगते क़दमों को आब-ओ-ताब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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चट्टान पर चीड़!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री लीलाधर जगूड़ी जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। जगूड़ी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री लीलाधर जगूड़ी जी की यह कविता – पानी पीटता रहा, हवा तराशती रही चट्टान कोदरारों के भीतर गूँजती हवा कुछ धूल छोड़ आती रही…
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वफ़ा, ख़ुलूस ओ मोहब्बत!
वफ़ा, ख़ुलूस ओ मोहब्बत को फिर समझना है,कहाँ लिखे हैं ये अल्फ़ाज़ तू किताब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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कैसा भी हो जवाब तो दे!
लबों को खोल तो कैसा भी हो जवाब तो दे,न बाँट सूद-ओ-ज़ियाँ को मगर हिसाब तो दे| क़ैसर ख़ालिद
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रफ़्तार हुआ करते थे!
वक़्त रुक रुक के जिन्हें देखता रहता है ‘सलीम’,ये कभी वक़्त की रफ़्तार हुआ करते थे| सलीम कौसर