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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Jun 2026

    अबकी यह बरस!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी के नवगीत का प्रारंभिक अंश, आगे के अंश भी मैं क्रमशः प्रस्तुत करूंगा- अबकी यह बरस बड़ा तरस तरस बीता! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 12th Jun 2026

    यार हुआ करते थे!

    मैं सर-ए-दश्त-ए-वफ़ा अब हूँ अकेला वर्ना,मेरे हम-राह मिरे यार हुआ करते थे| सलीम कौसर

  • 12th Jun 2026

    ये जो ज़िंदाँ में तुम्हें!

    ये जो ज़िंदाँ में तुम्हें साए नज़र आते हैं,ये कभी रौनक़-ए-दरबार हुआ करते थे| सलीम कौसर

  • 12th Jun 2026

    क्या हुआ तेरा वादा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा!फ़िल्म- हम किसी से कम नहींगीतकार- मजरूह सुल्तानपुरीसंगीतकार- राहुल देव बर्मनगायक- मोहम्मद रफ़ीप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 12th Jun 2026

    जाड़ा: दो कविताएँ!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की दो रचनाएं शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की यह एक ही विषय पर लिखी दो कविताएं – एक माघ की ठंडी हवाएँ डंक मार रही हैं,गर्म कपड़ों…

  • 11th Jun 2026

    इस भरे शहर में!

    जिन से आवारगी-ए-शब का भरम था वो लोग, इस भरे शहर में दो-चार हुआ करते थे| सलीम कौसर

  • 11th Jun 2026

    ख़रीदार हुआ करते थे!

    हम गुल-ए-ख़्वाब सजाते थे दुकान-ए-दिल में,और फिर ख़ुद ही ख़रीदार हुआ करते थे| सलीम कौसर

  • 11th Jun 2026

    आईना ख़ुद भी सँवरता था!

    आईना ख़ुद भी सँवरता था हमारी ख़ातिर,हम तिरे वास्ते तय्यार हुआ करते थे| सलीम कौसर

  • 11th Jun 2026

    एक ये घर, जिस घर में मेरा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में जावेद अख़्तर जी की ग़ज़ल का अंतिम शेर – एक ये घर, जिस घर में मेरा साज़-ओ-सामां रहता है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 11th Jun 2026

    वफ़ादार हुआ करते थे!

    इश्क़ करते थे फ़क़त पास-ए-वफ़ा रखने को,लोग सच-मुच के वफ़ादार हुआ करते थे| सलीम कौसर

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