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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Jun 2026

    बच्चों को उछलते देखा!

    आ गया याद वो बचपन का ज़माना ‘ख़ालिद’,जब कहीं फूल से बच्चों को उछलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 16th Jun 2026

    उगते देखा है जिसे!

    रोज़ ये मश्रिक-ओ-मग़रिब का तमाशा क्यूँ है,उगते देखा है जिसे उस को ही ढलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 16th Jun 2026

    हम तुम एक डगर के राही!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी के गीत ‘अगर चल सको साथ चलो तुम’ का अगला भाग– हम तुम एक डगर के राही आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 16th Jun 2026

    ज़माने में उछलते देखा!

    डाल दी पैरों में उस शख़्स के ज़ंजीर यहाँ,वक़्त ने जिस को ज़माने में उछलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 16th Jun 2026

    थे जो हुश्यार बहुत!

    अपने जज़्बात तो मशहूर थे लेकिन हम ने,थे जो हुश्यार बहुत उन को उबलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 16th Jun 2026

    चिंगारी कोई भड़के!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए, सावन जो अगन लगाए उसे कौन बुझाए!फिल्म- अमर प्रेमकलाकार- राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोरगीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार – राहुल देव बर्मन गायक- किशोर कुमारप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 16th Jun 2026

    डरो!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय विष्णु खरे जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। खरे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय विष्णु खरे जी की यह कविता – कहो तो डरो कि हाय यह क्यों कह दियान कहो तो डरो कि पूछेंगे चुप क्यों हो सुनो…

  • 15th Jun 2026

    पत्थर को पिघलते देखा!

    आतिश-ए-इश्क़ से बचिए कि यहाँ हम ने भी,मोम की तरह से पत्थर को पिघलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 15th Jun 2026

    ज़ुल्म को हम ने यहाँ!

    आज़माइश है, इजाज़त है कि मजबूरी है,ज़ुल्म को हम ने यहाँ फूलते-फलते देखा| क़ैसर ख़ालिद

  • 15th Jun 2026

    अगर चल सको!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी के गीत का प्रारंभिक अंश- अगर चल सको साथ चलो तुम! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

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