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रेन-बसेरे थे क्या हुए!
ऊँची इमारतें तो बड़ी शानदार हैं,लेकिन यहाँ तो रेन-बसेरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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दालान पूछते हैं कि !
खम्बों पे ला के किस ने सितारे टिका दिए,दालान पूछते हैं कि दीवाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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एक प्यार का नग़मा है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म-शोर के लिए मुकेश जी और लता जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे संतोषानंद जी ने लिखा था और इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोडी ने दिया था- एक प्यार का नग़मा है, मौजों की रवानी है, ज़िंदगी और कुछ भी नहीं,…
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पालतू!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। माचवे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता– पहले उस ने पाले कुछ पिल्लेबडे हुए, भाग गये;पाली कुछ बिल्लियाँ, वेदोस्तों को दे…
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किसने मिटा दिए हैं!
किस ने मिटा दिए हैं फ़सीलों के फ़ासले, वाबस्ता जो थे हम से वो अफ़्साने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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शोख़ परिंदे थे क्या हुए!
मुमकिन है कट गए हों वो मौसम की धार से,उन पर फुदकते शोख़ परिंदे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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बस्ती में चार चाँद से !
ख़ामोश क्यूँ हो कोई तो बोलो जवाब दो,बस्ती में चार चाँद से चेहरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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क्या जाने क्या हुए!
जिन से अँधेरी रातों में जल जाते थे दिए,कितने हसीन लोग थे क्या जाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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वो जागती जबीनें!
वो जागती जबीनें कहाँ जा के सो गईं,वो बोलते बदन जो सिमटते थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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न तो संज्ञा हैं हम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीया इंदुमति कौशिक जी के एक गीत की कुछ पंक्तियां अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनमें व्याकरण के बहाने यह बताया गया है कि आम आदमी किसी गिनती में नहीं आता- न तो संज्ञा हैं हम न विशेषणबस यही व्याकरण है हमारा! आशा है आपको…