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डूबेंगे हम ज़रूर!
गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो,डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ| कैफ़ी आज़मी
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काली मिट्टी!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह कविता– काली मिट्टी काले घरदिनभर बैठे-ठाले घर काली नदिया काला धनसूख रहे हैं सारे बन काला सूरज काले…
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थोड़ा सा प्यार भी!
की है कोई हसीन ख़ता हर ख़ता के साथ,थोड़ा सा प्यार भी मुझे दे दो सज़ा के साथ| कैफ़ी आज़मी
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सदियाँ गुज़र गईं!
पाया भी उन को खो भी दिया चुप भी हो रहे,इक मुख़्तसर सी रात में सदियाँ गुज़र गईं| कैफ़ी आज़मी
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मैं जिसे ओढता बिछाता हूँ!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की ग़ज़ल के कुछ शेर मैं जिसे ओढता बिछाता हूँ! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद । *****
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वीरानियाँ तो सब मिरे!
अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ,वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं| कैफ़ी आज़मी
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सर झुकाओगे तो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में बशीर बद्र जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी, चंदन दास जी आदि ने गाया है- सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ********
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कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं!
दीवाना पूछता है ये लहरों से बार बार,कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गईं| कैफ़ी आज़मी
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हमारी जिन्दगी!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता– हमारी जिन्दगी के दिन,बड़े संघर्ष के दिन हैं।हमेशा काम करते हैं,मगर कम दाम मिलते हैं।प्रतिक्षण हम बुरे शासन–बुरे…