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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Apr 2024

    एक सितारा कभी कभी!

    हर-चंद अश्क-ए-यास जब उमडे तो पी गए, चमका फ़लक पे एक सितारा कभी कभी| असर लखनवी

  • 19th Apr 2024

    दिल डूबने लगा तो!

    चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी, दिल डूबने लगा तो उभारा कभी कभी| असर लखनवी

  • 19th Apr 2024

    रूह बदन का बोझ!

    उम्र-सफ़र जारी है बस ये खेल देखने को, रूह बदन का बोझ कहाँ तक कब तक ढोती है|    शहरयार

  • 19th Apr 2024

    ख़ुद को तसल्ली देना!

    ख़ुद को तसल्ली देना कितना मुश्किल होता है, कोई क़ीमती चीज़ अचानक जब भी खोती है| शहरयार

  • 19th Apr 2024

    धरती में नींदें बोती है!

    ख़्वाब देखने की हसरत में तन्हाई मेरी, आँखों की बंजर धरती में नींदें बोती है| शहरयार

  • 19th Apr 2024

    यादों के सैलाब में!

    यादों के सैलाब में जिस दम मैं घिर जाता हूँ, दिल-दीवार उधर जाने की ख़्वाहिश होती है| शहरयार

  • 19th Apr 2024

    कनुप्रिया – पहला गीत

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना योगदान करने वाले, श्रेष्ठ हिन्दी कवि और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह उनकी काव्य पुस्तक ‘कनुप्रिया’ का पहला गीत है|   भारती जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 18th Apr 2024

    जागता हूँ मैं एक अकेला!

    जागता हूँ मैं एक अकेला दुनिया सोती है, कितनी वहशत हिज्र की लम्बी रात में होती है| शहरयार

  • 18th Apr 2024

    परछाईं को डरने के लिए!

    कितना आसाँ लग रहा है मुझ को आगे का सफ़र, छोड़ आया पीछे परछाईं को डरने के लिए| शहरयार

  • 18th Apr 2024

    सैर करने के लिए!

    ये जगह हैरत-सराए है कहाँ थी ये ख़बर, यूँही आ निकला था मैं तो सैर करने के लिए| शहरयार

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