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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Aug 2024

    इतना तो बता जाओ!

    इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले, वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते| असद भोपाली

  • 1st Aug 2024

    ऐ मौज-ए-हवादिस!

    ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या, हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते| असद भोपाली

  • 1st Aug 2024

    कुछ भी हो वो अब!

    कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते, हम मुजरिम-ए-तौहीन-ए-वफ़ा हो नहीं सकते| असद भोपाली

  • 1st Aug 2024

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-15

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज पंद्रहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…

  • 31st Jul 2024

    ख़ुदा जाने फिर कब!

    ‘नज़ीर’ आओ रो लें गले मिल के हम तुम, ख़ुदा जाने फिर कब मुलाक़ात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    जहाँ दिन न होगा!

    वहाँ क़ल्ब की रौशनी साथ देगी, जहाँ दिन न होगा फ़क़त रात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    मोहब्बत बहुत बे-मज़ा!

    मोहब्बत बहुत बे-मज़ा होगी जिस दिन, ज़बाँ बे-नियाज़-ए-शिकायात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    न सावन ही बरसा!

    न सावन ही बरसा न भादों ही बरसा, बहुत शोर सुनते थे बरसात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़!

    समझती है शाम ओ सहर जिस को दुनिया, तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़ की ख़ैरात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 31st Jul 2024

    तारों भरी रात होगी!

    मिरे अश्क जिस शब के दामन में होंगे, यक़ीनन वो तारों भरी रात होगी| नज़ीर बनारसी

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