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इतना तो बता जाओ!
इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले, वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते| असद भोपाली
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कुछ भी हो वो अब!
कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते, हम मुजरिम-ए-तौहीन-ए-वफ़ा हो नहीं सकते| असद भोपाली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-15
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज पंद्रहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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ख़ुदा जाने फिर कब!
‘नज़ीर’ आओ रो लें गले मिल के हम तुम, ख़ुदा जाने फिर कब मुलाक़ात होगी| नज़ीर बनारसी
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मोहब्बत बहुत बे-मज़ा!
मोहब्बत बहुत बे-मज़ा होगी जिस दिन, ज़बाँ बे-नियाज़-ए-शिकायात होगी| नज़ीर बनारसी
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तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़!
समझती है शाम ओ सहर जिस को दुनिया, तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़ की ख़ैरात होगी| नज़ीर बनारसी