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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-13
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज तेरहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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क़िस्मत का लिखा !
दुनिया मिरे सज्दे को इबादत न समझना, पेशानी पे क़िस्मत का लिखा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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मैं सज़ा काट रहा हूँ!
ये बात मुझे देर से मा’लूम हुई है, ज़िंदाँ है ये दुनिया मैं सज़ा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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ख़ुद अपने ही हाथों का लिखा!
ख़ुद अपने ही हाथों का लिखा काट रहा हूँ, ले देख ले दुनिया मैं पता काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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तलवार छीन लाए हैं!
मिरे क़बीले के बच्चों के खेल भी हैं अजीब, किसी सिपाही की तलवार छीन लाए हैं| राहत इंदौरी
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वतन की ज़मीन लाए हैं!
हँसो न हम पे कि हर बद-नसीब बंजारे, सरों पे रख के वतन की ज़मीन लाए हैं| राहत इंदौरी
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जो पर्बतों के लिए!
हमारी बात की गहराई ख़ाक समझेंगे, जो पर्बतों के लिए ख़ुर्दबीन लाए हैं| राहत इंदौरी
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-12
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज बारहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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ग़ज़ल की ज़मीन लाए हैं!
चमकते लफ़्ज़ सितारों से छीन लाए हैं, हम आसमाँ से ग़ज़ल की ज़मीन लाए हैं| राहत इंदौरी