A sky full of cotton beads like clouds
बाद-ए-ख़िज़ाँ का शुक्र करो ‘फ़ैज़’ जिस के हाथ,
नामे किसी बहार-ए-शिमाइल से आए हैं|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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