ख़िज़ाँ का शुक्र करो!

बाद-ए-ख़िज़ाँ का शुक्र करो ‘फ़ैज़’ जिस के हाथ,

नामे किसी बहार-ए-शिमाइल से आए हैं|

             फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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