Category: Uncategorized
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तिरे नाम से पहले पहले
अब तिरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं, कितनी रग़बत थी तिरे नाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़
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अंजाम से पहले पहले!
ख़ुश हो ऐ दिल कि मोहब्बत तो निभा दी तूने, लोग उजड़ जाते हैं अंजाम से पहले पहले| अहमद फ़राज़
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मेरी मूक पुकार!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले अपने समय के प्रमुख कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय…
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कहते रहें मर जाएँगे!
नेमत-ए-ज़ीस्त का ये क़र्ज़ चुकेगा कैसे, लाख घबरा के ये कहते रहें मर जाएँगे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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हम तिरी याद से!
किस क़दर होगा यहाँ मेहर-ओ-वफ़ा का मातम, हम तिरी याद से जिस रोज़ उतर जाएँगे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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ख़िज़ाँ का शुक्र करो!
बाद-ए-ख़िज़ाँ का शुक्र करो ‘फ़ैज़’ जिस के हाथ, नामे किसी बहार-ए-शिमाइल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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हर इक गाम ज़िंदगी!
हर इक क़दम अजल था हर इक गाम ज़िंदगी, हम घूम फिर के कूचा-ए-क़ातिल से आए हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़