Category: Uncategorized
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नदी की मस्त अदाएँ!
हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है, नदी की मस्त अदाएँ बुला रही हैं तुम्हें| साहिर लुधियानवी
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झुकी झुकी सी घटाएँ!
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से ख़ुशबू की भीक लेने को, झुकी झुकी सी घटाएँ बुला रही हैं तुम्हें| साहिर लुधियानवी
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हवाएँ बुला रही हैं!
तरस रहे हैं जवाँ फूल होंट छूने को, मचल मचल के हवाएँ बुला रही हैं तुम्हें| साहिर लुधियानवी
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ख़मोशियों की सदाएँ!
ये वादियाँ ये फ़ज़ाएँ बुला रही हैं तुम्हें, ख़मोशियों की सदाएँ बुला रही हैं तुम्हें| साहिर लुधियानवी
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किस मंज़िल-ए-मुराद
किस मंज़िल-ए-मुराद की जानिब रवाँ हैं हम, ऐ रह-रवान-ए-ख़ाक-बसर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी
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पाला हुआ पक्षी पिंजरे में था- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
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मगर पूछते चलो!
जो ख़ुद को कह रहे हैं कि मंज़िल-शनास हैं, उन को भी क्या ख़बर है मगर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी
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ख़बर पूछते चलो!
हम से अगर है तर्क-ए-तअ’ल्लुक़ तो क्या हुआ, यारो कोई तो उन की ख़बर पूछते चलो | साहिर लुधियानवी
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कुर्सी लगा के!
जो मेरे वास्ते कुर्सी लगाया करता था, वो मेरी कुर्सी से कुर्सी लगा के बैठ गया| ज़ुबैर अली ताबिश