Category: Uncategorized
-
इस आइने को कोई!
बहुत दिनों से मिरा दिल उदास है ‘मोहसिन’, इस आइने को कोई अक्स अब नया दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
मैं तेरे ख़त तिरी!
बढ़ा रही हैं मिरे दुख निशानियाँ तेरी, मैं तेरे ख़त तिरी तस्वीर तक जला दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
ज़मीं हूँ मैं भी मगर!
तू आसमान की सूरत है गिर पड़ेगा कभी, ज़मीं हूँ मैं भी मगर तुझ को आसरा दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
इसी ख़याल में गुज़री!
इसी ख़याल में गुज़री है शाम-ए-दर्द अक्सर, कि दर्द हद से बढ़ेगा तो मुस्कुरा दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
मैं ख़ुद उड़ा दूँगा!
हवा का हाथ बटाऊँगा हर तबाही में, हरे शजर से परिंदे मैं ख़ुद उड़ा दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
सारे दिए बुझा दूँगा!
ये तीरगी मिरे घर का ही क्यूँ मुक़द्दर हो, मैं तेरे शहर के सारे दिए बुझा दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
मरूँगा ख़ुद भी!
मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा, मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा| मोहसिन नक़वी
-
पल भर न हुआ जीवन प्यारा!
आज मैं हिन्दी की श्रेष्ठ कवियित्री स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं|लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की यह कविता- पल भर न हुआ जीवन प्यारा! पूजा के मंदिर में झाँका,अर्चन की चाहों को आँका,जग ने अपराधिनि ठहराया, आजीवन खुल…