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उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है!
अब हो मुझे देखिए कहाँ सुब्ह, उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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क्यूँ ग़म से नजात हो गई है!
ग़म से छूटकर ये ग़म है मुझको, क्यूँ ग़म से नजात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
अब हो मुझे देखिए कहाँ सुब्ह, उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़म से छूटकर ये ग़म है मुझको, क्यूँ ग़म से नजात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी