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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Nov 2022

    आशिक़ की बारात हो गई है!

    दुनिया है कितनी बे-ठिकाना, आशिक़ की बारात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    खेला हूँ तो मात हो गई है!

    जीती हुई बाज़ी-ए-मोहब्बत, खेला हूँ तो मात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    बीमार की रात हो गई है!

    इस दौर में ज़िंदगी बशर की, बीमार की रात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    मेरी औक़ात हो गई है!

    घटते घटते तिरी इनायत, मेरी औक़ात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    अब मेरी हयात हो गई है!

    क्या जानिए मौत पहले क्या थी अब मेरी हयात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है!

    अब हो मुझे देखिए कहाँ सुब्ह, उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    तस्वीर-ए-हयात हो गई है!

    जिस शय पे नज़र पड़ी है तेरी, तस्वीर-ए-हयात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    शायद कोई बात हो गई है!

    मुद्दत से ख़बर मिली न दिल की, शायद कोई बात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    क्यूँ ग़म से नजात हो गई है!

    ग़म से छूटकर ये ग़म है मुझको, क्यूँ ग़म से नजात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Nov 2022

    आँखों में जो बात हो गई है!

    आँखों में जो बात हो गई है, इक शरह-ए-हयात हो गई है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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