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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th May 2023

    उषस् (तीन)!

    आज मैं भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| सुबह के सुंदर चित्र चित्र प्रस्तुत करते हुए उन्होंने एक ही शीर्षक से कुछ कविताएं लिखी थीं, उनमें से एक आज प्रस्तुत है| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 23rd May 2023

    माहौल के ख़ूनी मंज़र

    वो मर्द नहीं जो डर जाए माहौल के ख़ूनी मंज़र से, इस हाल में जीना लाज़िम है जिस हाल में जीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    सीना मुश्किल है!

    करने को रफ़ू कर ही लेंगे दुनिया वाले सब ज़ख़्म अपने, जो ज़ख़्म दिल-ए-इंसाँ पे लगा उस ज़ख़्म का सीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    क़रीना मुश्किल है!

    वो शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से, बुझने का सलीक़ा आसाँ है जलने का क़रीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    पीना मुश्किल है!

    इक सब्र के घूँट से मिट जाती तब तिश्ना-लबों की तिश्ना-लबी, कम-ज़र्फी-ए-दुनिया के सदक़े ये घूँट भी पीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    सीना मुश्किल है!

    जब नाख़ुन-ए-वहशत चलते थे रोके से किसी के रुक न सके, अब चाक-ए-दिल-ए-इन्सानिय्यत सीते हैं तो सीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    दौर में जीना मुश्किल है

    ये दौर-ए-ख़िरद है दौर-ए-जुनूँ इस दौर में जीना मुश्किल है, अँगूर की मय के धोके में ज़हराब का पीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 23rd May 2023

    सबकी ज़िंदगानी है

    दिल मिला है जिन्हें हमारा सा, तल्ख़ उन सबकी ज़िंदगानी है| जोश मलीहाबादी

  • 23rd May 2023

    असिधारा-पथ!

    आज मैं राष्ट्रप्रेम की कविताएं लिखने वाले प्राचीन कवि पद्म भूषण स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है पद्म भूषण स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की यह कविता  – ओ असिधारा-पथ के गामी!विकट सुभट तुम, अथक पथिक…

  • 22nd May 2023

    सिखाएँ रस्म-ए-वफ़ा

    आप हमको सिखाएँ रस्म-ए-वफ़ा, मेहरबानी है मेहरबानी है| जोश मलीहाबादी

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