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उषस् (तीन)!
आज मैं भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| सुबह के सुंदर चित्र चित्र प्रस्तुत करते हुए उन्होंने एक ही शीर्षक से कुछ कविताएं लिखी थीं, उनमें से एक आज प्रस्तुत है| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
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माहौल के ख़ूनी मंज़र
वो मर्द नहीं जो डर जाए माहौल के ख़ूनी मंज़र से, इस हाल में जीना लाज़िम है जिस हाल में जीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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सीना मुश्किल है!
करने को रफ़ू कर ही लेंगे दुनिया वाले सब ज़ख़्म अपने, जो ज़ख़्म दिल-ए-इंसाँ पे लगा उस ज़ख़्म का सीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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क़रीना मुश्किल है!
वो शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से, बुझने का सलीक़ा आसाँ है जलने का क़रीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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पीना मुश्किल है!
इक सब्र के घूँट से मिट जाती तब तिश्ना-लबों की तिश्ना-लबी, कम-ज़र्फी-ए-दुनिया के सदक़े ये घूँट भी पीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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सीना मुश्किल है!
जब नाख़ुन-ए-वहशत चलते थे रोके से किसी के रुक न सके, अब चाक-ए-दिल-ए-इन्सानिय्यत सीते हैं तो सीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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दौर में जीना मुश्किल है
ये दौर-ए-ख़िरद है दौर-ए-जुनूँ इस दौर में जीना मुश्किल है, अँगूर की मय के धोके में ज़हराब का पीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी
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असिधारा-पथ!
आज मैं राष्ट्रप्रेम की कविताएं लिखने वाले प्राचीन कवि पद्म भूषण स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है पद्म भूषण स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की यह कविता – ओ असिधारा-पथ के गामी!विकट सुभट तुम, अथक पथिक…