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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st May 2023

    समुंदर न मिलेगा!

    दुनिया की तलब है तो क़नाअत ही न करना, क़तरे ही से ख़ुश हो तो समुंदर न मिलेगा|   वसीम बरेलवी

  • 21st May 2023

    मय-ख़ाने की रौनक़!

    जाती है चली जाए ये मय-ख़ाने की रौनक़, कम-ज़र्फ़ों के हाथों में तो साग़र न मिलेगा| वसीम बरेलवी

  • 21st May 2023

    न दैन्यं न पलायनम्!

    आज मैं भारत के पूर्व प्रधान मंत्री, श्रेष्ठ राजनेता और कवि, भारत रत्न- स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| वाजपेयी जी राजनीति में रहते हुए भी हमेशा कविता से जुड़े रहे और उन्होंने बहुत सी यादगार कविताएं लिखो हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की…

  • 20th May 2023

    यहाँ घर न मिलेगा!

    सर पर तो बिठाने को है तय्यार ज़माना, लेकिन तिरे रहने को यहाँ घर न मिलेगा| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    तुझे डर न मिलेगा!

    मैं ये नहीं कहता कि मिरा सर न मिलेगा, लेकिन मिरी आँखों में तुझे डर न मिलेगा| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    तुम भी संगसार न हो!

    गुनाहगारों पे उँगली उठाए देते हो, ‘वसीम’ आज कहीं तुम भी संगसार न हो| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    अश्क-बार न हो!

    दुखी समाज में आँसू भरे ज़माने में, उसे ये कौन बताए कि अश्क-बार न हो| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    ग़म-गुसार न हो!

    ज़रा सी बात पे घुट घुट के सुब्ह कर देना, मिरी तरह भी कोई मेरा ग़म-गुसार न हो| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    मेरा इंतिज़ार न हो!

    मैं गाँव लौट रहा हूँ बहुत दिनों के बाद, ख़ुदा करे कि उसे मेरा इंतिज़ार न हो| वसीम बरेलवी

  • 20th May 2023

    मौजों पे इख़्तियार न हो

    हवा ख़िलाफ़ हो मौजों पे इख़्तियार न हो, ये कैसी ज़िद है कि दरिया किसी से पार न हो| वसीम बरेलवी

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