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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th May 2023

    ज़मीं थी मेरे नाम!

    वो जो दो-गज़ ज़मीं थी मेरे नाम, आसमाँ की तरफ़ उछाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    बोला है कोई आईना

    झूट बोला है कोई आईना, वर्ना पत्थर में कैसे बाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    न ये कमाल आया!

    ज़िंदगी किस तरह गुज़ारते हैं, ज़िंदगी भर न ये कमाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    अभिनेता!

    प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्यकार स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| एक कुशल व्यंग्यकार होने के अलावा त्यागी जी ने काफी अच्छी कविताएं भी लिखी हैं, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता  – बातों का खो गया…

  • 17th May 2023

    नेकियों में डाल आया!

    कौन दरियाओं का हिसाब रखे, नेकियाँ नेकियों में डाल आया| राहत इंदौरी

  • 17th May 2023

    फिर सवाल आया!

    बैठे बैठे कोई ख़याल आया, ज़िंदा रहने का फिर सवाल आया| राहत इंदौरी

  • 17th May 2023

    वो ख़त पागल हवा के

    वो ख़त पागल हवा के आँचलों पर, किसे तुम ने लिखा था याद होगा|     बशीर बद्र

  • 17th May 2023

    चेहरा बुझ रहा था!

    उदासी और बढ़ती जा रही थी, वो चेहरा बुझ रहा था याद होगा| बशीर बद्र

  • 17th May 2023

    कोई आँसू गिरा था!

    बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें, कोई आँसू गिरा था याद होगा| बशीर बद्र

  • 17th May 2023

    उजले फूल लेकर!

    बहुत से उजले उजले फूल लेकर, कोई तुम से मिला था याद होगा| बशीर बद्र

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