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अन्वेषण!
आज मैं हिन्दी कविता की पुरानी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| त्रिपाठी जी की कुछ कविताएं आज भी बहुत लोकप्रिय हैं, जैसे यह प्रार्थना- ‘हे प्रभो आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए’| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी जी की यह कविता – मैं…
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काएँ काएँ करने लगे!
अजीब रंग था मज्लिस का ख़ूब महफ़िल थी, सफ़ेद पोश उठे काएँ काएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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इल्तिजाएँ करने लगे!
झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले, वो धूप है कि शजर इल्तिजाएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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आँखों से टूट कर आँसू
ज़मीं पर आ गए आँखों से टूट कर आँसू, बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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ज़मीं पर इक सूरज!
लहू-लुहान पड़ा था ज़मीं पर इक सूरज, परिंदे अपने परों से हवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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दिन प्रतिदिन वह आता है – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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बीमारियों के सौदागर
तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर, ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी