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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th May 2023

    मेरी राह मत रोको!

    आज एक बार फिर से मैं अपने समय में काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| निर्धन जी का काव्य प्रस्तुति का अपना ही अलग अंदाज़ था, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय शिशुपाल…

  • 16th May 2023

    उदासी से भर गए होते

    बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा, ख़ुशी नहीं तो उदासी से भर गए होते| बशीर बद्र

  • 16th May 2023

    तुम भी आ के लौट गए

    अजीब रात थी कल तुम भी आ के लौट गए, जब आ गए थे तो पल भर ठहर गए होते| बशीर बद्र

  • 16th May 2023

    फूल चुन लिए वर्ना

    ग़ज़ल ने बहते हुए फूल चुन लिए वर्ना, ग़मों में डूब कर हम लोग मर गए होते| बशीर बद्र

  • 16th May 2023

    सिंगार-दान में रहते हो

    सिंगार-दान में रहते हो आइने की तरह, किसी के हाथ से गिर कर बिखर गए होते| बशीर बद्र

  • 16th May 2023

    सँवर गए होते!

    कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते, किसी की आँख में रह कर सँवर गए होते| बशीर बद्र

  • 16th May 2023

    दुनिया बदल सकती है

    बदलना चाहो तो दुनिया बदल भी सकती है, अजब फ़ुतूर सा हर वक़्त सर में रहता है| निदा फ़ाज़ली

  • 16th May 2023

    मेरे घर में रहता है!

    जो मिलना चाहो तो मुझ से मिलो कहीं बाहर, वो कोई और है जो मेरे घर में रहता है| निदा फ़ाज़ली 

  • 16th May 2023

    बन गई कविता मेरी!

    एक बार फिर से मैं आज अपने समय के अत्यंत प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंग जी की काव्य प्रस्तुति की अपनी ही अलग शैली थी, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का…

  • 15th May 2023

    सूरज सहर में रहता है

    अजीब दौर है ये तय-शुदा नहीं कुछ भी, न चाँद शब में न सूरज सहर में रहता है| निदा फ़ाज़ली

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