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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th May 2023

    कब हमारे थे!

    उम्र-ए-जावेद की दुआ करते, ‘फ़ैज़’ इतने वो कब हमारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    दामन में आ गिरे सारे

    मेरे दामन में आ गिरे सारे, जितने तश्त-ए-फ़लक में तारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    दिल पे वारे थे!

    जब वो लाल-ओ-गुहर हिसाब किए, जो तिरे ग़म ने दिल पे वारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    और भी सहारे थे!

    तेरे क़ौल-ओ-क़रार से पहले, अपने कुछ और भी सहारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    रंग-ओ-ख़ुशबू के

    रंग-ओ-ख़ुशबू के हुस्न-ओ-ख़ूबी के, तुमसे थे जितने इस्तिआरे* थे| *उपमाएं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    जितने सुख़न तुम्हारे थे

    हमने सब शेर में सँवारे थे, हमसे जितने सुख़न तुम्हारे थे| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th May 2023

    कुछ भी तो अब!

    आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी नवगीतकार स्वर्गीय नईम जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ|  उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नईम जी का यह नवगीत – कुछ भी तो अबतन्त नहीं है-ऊपरवाले की लाठी में। दीमक चाट गयी है शायद-ये भी ऊपरवाला जाने,भुस में तिनगी जिसने…

  • 25th May 2023

    शायरी तुझको गँवाया

    क्या पता हो भी सके इस की तलाफ़ी कि नहीं, शायरी तुझको गँवाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th May 2023

    बहुत दिन हमने!

    मुद्दतों तर्क-ए-तमन्ना पे लहू रोया है, इश्क़ का क़र्ज़ चुकाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th May 2023

    बहुत दिन हमने!

    तुम भी इस दिल को दुखा लो तो कोई बात नहीं, अपना दिल आप दुखाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर

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